‘अपध्नन्तो अराव्ण:’ मन्त्र का वैज्ञानिक अर्थ

 आक्षेप संख्या १ (शेष) अपध्नन्तो अराव्ण: पवमाना: स्वर्दृश:। योनावृतस्य सीदत॥ (ऋ.९.१३.९) इस मन्त्र का आपने निम्नानुसार भाष्य उद्धृत किया है— "May you (O love divine), the beholder of the path…

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