दुर्बल सेना कैसे परास्त करे प्रबल शत्रु को
पुत्रमत्तु यातुधानी: स्वसारमुत नप्त्यम्।अधा मिथो विकेश्यो विघ्नतां यातुधान्यो वितृह्यन्तामराय्य:॥ [अथर्ववेद १.२८.४] इस मन्त्र का देवता चातन एवं छन्द पथ्यापंक्ति होने से इसके दैवत व छान्दस प्रभाव से विभिन्न भेदन-छेदन क्रियाएँ…