प्रथम आक्षेप की समीक्षा

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सर्वप्रथम हम वेदों पर उठाये गये आक्षेपों का उत्तर दे रहे हैं। उसमें भी सबसे अधिक प्रक्षेप वेद का भेद साइट पर सुलेमान रजवी ने किये हैं। राजवी वेदों पर हिंसा एवं साम्प्रदायिकता का आरोप लगाते हुए लिखते हैं—

आक्षेप संख्या १ – Vedas are terror manual which turns humans into savages. Many tribes were destroyed as a result of the violent passages in Vedas. As per Vedas, you must kill a person who rejects Vedas, who hates Vedas and Ishwar, who does not worship, who does not make offerings to Ishwar, who insults god (Blasphemy), one who oppresses a Brahmin etc. There are several passages in Vedas which calls for death of disbelievers.

अर्थात् इनकी दृष्टि में वेद मनुष्य को बर्बर आतंकी बनाने वाला ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ ने अनेक जनजातियों को नष्ट कर दिया है। वेद और ईश्वर को न मानने वाले, ईश्वर की पूजा न करने वाले, ईश्वर की निन्दा करने वाले और ब्राह्मïण का अपमान करने वाले को मार डालने का आदेश वेद में दिया गया है।

इसके साथ ही रजवी का कहना है कि वेदों को मानने वाले वेदों में निर्दिष्ट हिंसा को नहीं देखते, बल्कि अन्य सम्प्रदायों के ग्रन्थों का गलत अर्थ करके उन पर हिंसा का आरोप लगाते हैं।

आक्षेप की समीक्षा – मैं रजवी के साथ सभी इस्लामी विद्वानों से पूछना चाहूँगा कि मक्का-मदीना से प्रारम्भ हुआ इस्लाम क्या शान्ति और सत्य के द्वारा विश्व के ५६-५७ देशों में फैला है? क्या तैमूर, अलाउद्दीन खिलजी, बाबर, अकबर और औरंगजेब जैसे लोग इस्लाम के शान्तिदूत बनकर भारत में आए थे? क्या इन शान्तिदूतों की शान्ति से आहत होकर हजारों रानियों ने जौहर करके अपने प्राण गँवाए थे? क्या उन्होंने भारत में शान्ति की स्थापना के लिए हजारों मन्दिर तोड़े थे? क्या कुरान में काफिरों की गर्दनें उड़ाने का वर्णन नहीं है? आप वेदानुयायियों के द्वारा वनवासियों, जिन्हें षड्यन्त्रपूर्वक आदिवासी कहा गया है, की हत्या का आरोप लगा रहे हैं। आपको इतनी समझ तो रखनी चाहिए कि भारत में आज भी वनवासी वर्ग अपनी परम्परा व मान्यताओं को प्रसन्नतापूर्वक निभा रहा है और इस्लामी देशों में सभी को बलपूर्वक या तो इस्लामी मान्यताओं को मानने के लिए विवश किया गया है अथवा उन्हें नष्ट कर दिया गया है। भारत में तो सम्पूर्ण वनवासी समाज क्षत्रियों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना बलिदान देता चला आया है, चाहे इस्लामी आक्रान्ताओं के विरुद्ध युद्ध हो अथवा अंग्रेजों के विरुद्ध। वनवासियों ने सदैव राष्ट्र व धर्म की रक्षा के लिए सदैव अपना बलिदान दिया है। इसलिए आपको अपने घर की चिन्ता करनी चाहिए, हमारे घर की नहीं। अगर वेदानुयायी समाज हिंसक होता, तो संसार में कोई दूसरा सम्प्रदाय पैदा ही नहीं होता और यदि पैदा हो जाता, तो वह जीवित भी नहीं रहता।

आप कुरान पर किये गये किसी आक्षेप को नासमझी का परिणाम बता रहे हैं, तो कृपया समझदारी का परिचय देकर क्या आप कुरान के उन अनुवादों को नष्ट करवा कर उनके सही अनुवाद कराने का साहस करेंगे? छह दिन में सम्पूर्ण सृष्टि का बन जाना, मिट्टी से मानव का शरीर बन जाना, खुदा का तख्त पर बैठे रहना एवं अन्य सृष्टि सम्बन्धी आयतों की सही व्याख्या करके सम्पूर्ण सृष्टि प्रक्रिया को मुझे समझाने का प्रयास करेंगे? मैं निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि कोई भी इस्लामी विद्वान् इसमें समर्थ नहीं हो सकता।

आपने वेद को तो सही ढंग से समझ ही लिया होगा, तभी तो आरोप लगा रहे हैं। यदि आप वेद समझते हैं, तब तो आपको किसी के भाष्य उद्धृत करने की आवश्यकता ही नहीं थी। यहाँ ऐसा प्रतीत होता है कि आपका मुख्य लक्ष्य आर्यसमाज एवं पौराणिक (कथित सनातनी हिन्दु) को ही बदनाम करना है। आपको संस्कृत भाषा का कोई ज्ञान नहीं है, अन्यथा आप आचार्य सायण का भाष्य भी उद्धृत करते। आपने श्री देवीचन्द को भी आर्य विद्वान् कहा है, यह ज्ञान क्या आपको खुदा ने दिया है कि देवीचन्द आर्यसमाज के विद्वान् थे? मैंने तो आर्य समाज में किसी देवीचन्द नामक वेदभाष्यकार का नाम तक नहीं सुना। भाष्यों में भी प्राय: आपने अंग्रजी अनुवादों को ही अधिक उद्धृत किया है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि आपको हिन्दी भाषा का भी बहुत अधिक ज्ञान नहीं है और केवल अंग्रेजी भाषा पढक़र वेद के अधिकारी विद्वान् बनकर वेद पर आक्षेप करने बैठ गये। मैं मानता हूँ कि ऋषि दयानन्द के अतिरिक्त अन्य सभी भाष्यकारों से वेदभाष्य करने में भारी भूलें हुई हैं। अब हम क्रमश: आपके द्वारा उद्धृत एक-एक वेद मन्त्र पर विचार करते हैं—

क्रमशः…

Acharya Agnivrat

As the Founder Chairman of the Vaidic and Modern Physics Research Centre, established under the auspices of Shri Vaidic Swasti Pantha Nyas in 2003, I lead endeavors in scientific interpretation of the Ancient Vedic Texts. Our center serves as a pivotal hub for research amalgamating ancient Vedic wisdom with contemporary physics.