
प्रति दह यातुधानान् प्रति दह किमीदिन:।प्रतीची: कृष्णवर्तने सं दह यातुधान्य:॥ [अथर्ववेद १.२८.२] इसका देवता चातन है। यह पद ‘चते याचने’ धातु, जो वेद में चातयतिर्नाशने (निरु.६.३) के अनुसार हिंसा अर्थ
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प्रति दह यातुधानान् प्रति दह किमीदिन:।प्रतीची: कृष्णवर्तने सं दह यातुधान्य:॥ [अथर्ववेद १.२८.२] इसका देवता चातन है। यह पद ‘चते याचने’ धातु, जो वेद में चातयतिर्नाशने (निरु.६.३) के अनुसार हिंसा अर्थ

पुत्रमत्तु यातुधानी: स्वसारमुत नप्त्यम्।अधा मिथो विकेश्यो विघ्नतां यातुधान्यो वितृह्यन्तामराय्य:॥ [अथर्ववेद १.२८.४] इस मन्त्र का देवता चातन एवं छन्द पथ्यापंक्ति होने से इसके दैवत व छान्दस प्रभाव से विभिन्न भेदन-छेदन क्रियाएँ

कुछ विश्वसनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि कुछ वेद-विरोधी और वेद से अनभिज्ञ तथाकथित ‘विद्वान्’ अपने शिष्यों और अनुयायियों को माध्यम बनाकर ‘वैदिक रश्मि विज्ञान’ तथा इस संस्थान के

आज अपने देश में हिन्दुत्व व सनातन की चर्चाएँ सुनने को मिलती हैं, नारे, झण्डे, डण्डे, शस्त्र संचालन आदि के प्रेरक और ओजस्वी भाषण देने वाले भी बहुत हैं। मुस्लिमों

आक्षेप संख्या—10 Rig Veda 6.26.3 Thou didst impel the sage to win the daylight, didst ruin Susna for the pious Kutsa. The invulnerable demon’s head thou clavest when thou wouldst

आक्षेप संख्या—9 Yajur Veda 5.26 By impulse of God Savitar I take thee with arms of Asvins, with the hands of Peahen.Thou art a woman. Here I cut the necks

आक्षेप संख्या—8 (Beheading the Demons – Non Hindus) Atharva Veda 1.7.7 O Agni, bring thou hither ward the Yatudhanas bound and chained. And afterward let Indra tear their heads off

इन दिनों सर्वोच्च न्यायालय में स्वामी रामदेव जी को एक अपराधी की भाँति प्रस्तुत करना नि:सन्देह भारत के भविष्य को दर्शाता है। मैं ऐसा इस कारण कह रहा हूँ कि

आक्षेप संख्या—7 Rig Veda 1.103.6 “…The Hero, watching like a thief in ambush, goes parting the possessions of the godless.” Tr. Ralph T.H. Griffith अग्नीषोमा चेति तद्वीर्यं वां यदमुष्णीतमवसं पणिं

आक्षेप संख्या—6 Rig Veda 1.103.6 “…The Hero, watching like a thief in ambush, goes parting the possessions of the godless.” Tr. Ralph T.H. Griffith आक्षेप का उत्तर— यहाँ ये महाशय
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